🕊️ आशा और सांत्वना Ayat #52 dari 100

भजन संहिता 34:18

"यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।"
← सभी वचनों पर वापस जाएं