🕊️ आशा और सांत्वना Ayat #46 dari 100

भजन संहिता 121:1-2

"मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी? मेरी सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।"
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