💡 बुद्धि और मार्गदर्शन Ayat #56 dari 100

भजन संहिता 1:1-2

"क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।"
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